दिव्यांग श्रेया ने रचा इतिहास, यूपीएससी परीक्षा में अर्जित किया 60वां रैंक

सिंगरौली। जन्म से ही मूक-बधिर श्रेया ने न केवल दिव्यांगता को चुनौती दी है वरन् लोक सेवा आयोग, यूपीएससी की परीक्षा में 60 वां रैंक अर्जित कर समाज के लिए एक उदाहरण बन गई है। सतना की श्रेया ने हिंदी माध्यम के निजी विद्यालय से नर्सरी से हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी की। श्रेया ने इंदौर से इलेक्ट्रिकल में बी.ई. (बी.टेक) किया।

हिंदी माध्यम की छात्रा होने के कारण उन्हें कठिनाई हुई, लेकिन इस मूक बधिर बेटी ने पहाड़ जैसी कठिनाई को अपने साहस के सामने टिकने नहीं दिया। श्रेया ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई कड़ी मेहनत और लगन से पूरी की और अपनी श्रेणी की टॉपर रहीं। 2019 में श्रेया ने इलेक्ट्रिकल से ग्रेजुएशन करने के बाद यूपीएससी के लिए पहला मौका लिया।

लेकिन सफलता नहीं मिली। 2020 में दूसरा प्रयास किया और 16-16 घण्टे की कड़ी मेहनत रंग लाई। बीते 12 अप्रैल 2021 को श्रेया के परीश्रम का परिणाम सफलता के रूप में उनके हाथों में था। इसके पहले श्रेया का चयन कोल इंडिया, न्युक्लियर पावर कॉर्पोरेशन और पावर ग्रिड में भी हो चुका था। लेकिन श्रेया का लक्ष्य प्रशासनिक सेवा रहा जिसे उन्होंने शानदार ढंग से हासिल किया।

माँ ने भी किया त्याग

श्रेया की माँ का कहना है कि उनकी बेटी ने उन्हें शिक्षिका बनने का अवसर उपलब्ध कराया। श्रेया के पिता एक व्यवसायी हैं। श्रेया ने जिस हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़ाई पूरी की उसी स्कूल में श्रेया की मां आज प्रिंसिपल हैं। श्रेया की माँ अंशु राय कहती हैं कि दिव्यांग बच्चों को कभी बेचारा न समझें।

उन्होंने बताया कि पहले वे एक गृहणी थीं। अपनी दिव्यांग बेटी को स्कूल छोड़ने आती थी तो उन्हें बेटी की चिंता सताती थी इसलिए वे स्कूल की छुट्टी होने तक वहीं बैठी रहती थीं। एक दिन स्कूल के प्रिंसिपल ने उनकी योग्यता के बारे में जानकर उन्हें उसी स्कूल में शिक्षिका के पद पर नियुक्त कर दिया।

इस तरह एक दिव्यांग बेटी के चलते एक मां शिक्षिका बन गयीं। यह उसके लिए वरदान साबित हुई। श्रेया की उपलब्धि पर उसके माता पिता बेहद खुश हैं। श्रेया की मेहनत के आगे उसका दिव्यांग होना कहीं आड़े नहीं आया। श्रेया ने इंडियन इंजीनिरिंग सर्विसेस में हियरिंग इंपेयर्ड कैटेगरी में टॉप किया था।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button