इंजीनियरों के जुनून से रीवा में दो दिन में लगा ऑक्सीजन प्लांट

उत्पादन शुरू, हर दिन भरे जायेंगे 100 सिलेण्डर

सिंगरौली। बड़ी चुनौती बनकर उभरे कोरोना संकट के बीच प्रशासन की पहल और टेक्नोक्रेट्स के जूनून की एक उत्साहवर्धक खबर सामने आई है। कोरोना के गंभीर रोगियों के उपचार के लिये आवश्यक पर्याप्त ऑक्सीजन की अब रीवा जिले में उपलब्धता हो गई है। यहाँ गंभीर रोगियों के लिये लगातार ऑक्सीजन की आपूर्ति करना बहुत बड़ी चुनौती बन गई थी। रीवा में प्रशासनिक अधिकारियों, डॉक्टरों तथा इंजीनियरों ने इस चुनौती का मुकाबला करने के लिये डटकर प्रयास के फलस्वरूप यहाँ महज दो दिन में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित कर उत्पादन प्रारंभ कर दिया गया।

इस कार्य में जन प्रतिनिधियों का भी सहयोग रहा। ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिये सुपर स्पेशिलिटी हास्पिटल में केवल दो दिन में लगातार काम करके ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया गया। इस प्लांट से 29 अप्रैल से प्रतिदिन 100 सिलेण्डरों में ऑक्सीजन भरने का काम भी शुरू हो गया है। इससे सुपर स्पेशिलिटी हास्पिटल में मांग के अनुसार ऑक्सीजन की शत-प्रतिशत आपूर्ति हो जायेगी। साथ ही संजय गांधी हास्पिटल को आवश्यकता पड़ने पर ऑक्सीजन उपलब्ध करायी जा सकेगी। रोगियों के उपचार के लिये समर्पित भाव से कार्य करने के जज्बे और जुनून ने इस जटिल कार्य को दो दिन में ही संभव कर दिखाया है। इस प्लांट को लगाने में पूर्व मंत्री एवं विधायक रीवा राजेन्द्र शुक्ल तथा जिले के कई समाजसेवियों ने अनुकरणीय योगदान दिया है।

कलेक्टर रीवा का कहना है कि…

इस संबंध में कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने बताया कि जिले में रोगियों के उपचार के लिये ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। सुपर स्पेशिलिटी हास्पिटल में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की पूरी प्रक्रिया केवल सात दिनों में पूरी की गई। कम अवधि का टेण्डर जारी करके दिल्ली से ऑक्सीजन प्लांट मंगवाया गया। कुल 89 लाख रूपये की लागत से प्लांट स्थापित किया गया। दिल्ली से मशीनें बाहर निकलने में कई बाधाएं आ रही थीं। विभिन्न स्तर पर प्रयास करके मशीनें प्राप्त की गई।। प्लांट स्थापित करने के लिये बिजली की लाइन, गैस लाइन तथा अन्य आवश्यक तैयारियां मशीन पहुंचने के पूर्व ही कर ली गई थीं। मशीन को स्थापित करने में इंजीनियर नीरज सिंह तथा उनके सहयोगियों ने लगातार दो दिनों तक अथक परिश्रम किया। जिसके परिणामस्वरूप 27 अप्रैल को ऑक्सीजन प्लांट बनकर तैयार हो गया। इसका परीक्षण करने में लगभग 30 घंटे का समय लगा। अंतत: 29 अप्रैल को प्लांट से सिलेण्डरों में ऑक्सीजन भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई।

वातावरण से ऑक्सीजन संग्रहित करता है यह प्लांट

यह प्लांट वातावरण से ऑक्सीजन लेकर उसे संघनित करके सिलेण्डरों में भरता है। स्थानीय स्तर पर प्रतिदिन 100 सिलेण्डर की उपलब्धता से गंभीर रोगियों के उपचार में बड़ी सहूलियत मिलेगी। ऑक्सीजन प्लांट लगाने में डॉ. अवतार सिंह, लोक निर्माण विभाग के अधिकारी तथा कर्मचारी एवं इंजीनियरों ने सराहनीय योगदान दिया है।

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