बिजली उत्पादन कंपनियों का वितरण कंपनियों पर बकाया बढ़ा

राज्यों में बढ़ सकती है बिजली कटौती

सार्वजनिक क्षेत्र की पॉवर जेनरेशन कंपनियों (जेनको) का बकाया बढ़ता चला जा रहा है और बिजली का वितरण करने वाली (डिस्कॉम) कंपनियां उसका समय से भुगतान नहीं कर रही हैं। ऐसे में अब केंद्रीय जेनको अपने पुराने बकाये की वसूली के लिए सख्त कदम उठा रही हैं। नोटिस जारी करने, बिजली आपूर्ति कम करने से लेकर त्रिपक्षीय समझौते (टीपीए) लागू करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। जेनको को केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय का समर्थन मिल रहा है। चूक करने वाले राज्यों व वितरण कंपनियों के खिलाफ लगातार सख्ती बढ़ रही है। इन स्थितियों में राज्यों में आपूर्ति की जा रही बिजली की कटौती भी बढ़ सकती है जिससे आम नागरिक की परेशानी भी बढ़ सकती है।

क्या है टीपीए

केंद्रीय बिजली उत्पादन कंपनियों, वितरण कंपनियों और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच त्रिपक्षीय समझौता होता है। इस समझौते के तहत केंद्रीय बैंक राज्यों के खाते में से चूक वाली राशि काट सकता है। इसे टीपीए कहते हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने झारखंड, कर्नाटक और तमिलनाडु के मामलों में टीपीए लागू करने के कदम उठाए हैं। इनसे कुल 30,087 करोड़ रुपये का बकाया है।

झारखंड से वसूले 714 करोड़

पिछले महीने बिजली मंत्रालय ने झारखंड से 714 करोड़ रुपये वसूले हैं। राज्य सरकार ने टीपीए लागू करने को लेकर आपत्ति की है और टीपीए से निकल जाने तक की धमकी दी है। बहरहाल केंद्र सरकार इस मामले में आगे बढ़ी है और उसने राज्य सरकार के खाते में से यह राशि काट ली है।

एनटीपीसी ने दिया उत्पादन घटाने का नोटिस

वहीं इस बीच एनटीपीसी और अन्य केंद्रीय बिजली उत्पादन कंपनियों ने कुछ राज्यों को बिजली आपूर्ति कम करने का नोटिस भी जारी किया है। इसमें बिजली वितरण कंपनियों या राज्य द्वारा बिजली के बकाये का भुगतान आपूर्ति के 90 दिन के भीतर न करने की स्थिति में बिजली कटौती करने या खराब स्थिति में बिजली काट देने की बात कही गई है।

एनटीपीसी ने सितंबर के पहले सप्ताह में नियमन नोटिस भेजा था, उसके बाद उसे 486 करोड़ रुपये मिले। इसी तरह से नीपको ने त्रिपुरा को तत्काल बकाया भुगतान कर देने के लिए नोटिस भेजा है और ऐसा न करने पर बिजली कटौती करने की बात कही गई है।

टीएचडीसी ने उत्तर प्रदेश को भेजा नोटिस

टीएचडीसी ने 422 करोड़ रुपये बकाये के लिए उत्तर प्रदेश को बिजली कटौती कर देने का नोटिस भेजा है। अधिकारियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश विद्युत निगम ने सितंबर तक बकाया भुगतान करने की प्रतिबद्धता जताई है।

एसजेवीएन ने बकाया भुगतान न करने के कारण पिछले छह महीने से कुछ दिनों के लिए जम्मू कश्मीर की बिजली आपूर्ति कम कर दी है।

जून, 2020 में डिस्कॉम का बकाया 1.3 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था। इसी महीने में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिजली वितरण क्षेत्र को दुरुस्त करने के लिए विशेष नकदी डालने की योजना की घोषणा की थी। वितरण कंपनियों के लिए 90,000 करोड़ रुपये की कर्ज योजना पेश की गई थी, जिसे वे बिजली उत्पादन कंपनियों व पारेषण कंपनियों को बकाये का भुगतान कर सकें। सरकारी कर्जदाता बिजली वित्त निगम (पीएफसी) और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) दोनों को 45,000 करोड़ रुपये कर्ज देने थे।

बहरहाल इस योजना का बहुत सीमित असर पड़ा। मार्च, 2021 तक बकाया थोड़ा कम होने के बाद जून में यह फिर बढऩे लगा, जब गर्मी के महीने में मांग बढ़ी। 31 अगस्त तक जेनको का डिस्कॉम पर बकाया 96,829 करोड़ रुपये था। पिछले साल समान महीने बकाया 93,908 करोड़ रुपये था।

वित्तीय रूप से खस्ताहाल डिस्कॉम अपना भुगतान समय से करने से चूक रही हैं। इक्रा रेटिंग्स ने हाल की रिपोर्ट में कहा था कि वितरण सेग्मेंट में कर्ज का परिदृश्य नकारात्मक बना हुआ है।

इक्रा के एक अनुमान के मुताबिक सरकारी वितरण कंपनियों का सकल कर्ज अखिल भारतीय स्तर पर वित्त वर्ष 22 में 6 लाख करोड़ रुपये को पार कर सकता है, जो वित्त वर्ष 21 में अनुमानित रूप से 5 लाख करोड़ रुपये है। यह बकाया उदय योजना के पहले के 4 लाख करोड़ रुपये के स्तर से कहीं ज्यादा है। यह बढ़ोतरी नकदी पैकेज के तहत लिए गए कर्ज की वजह से हो सकती है। डिस्कॉम के कर्ज के आधिकारिक आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

केंद्र की बिजली उत्पादन कंपनियां अगस्त, 2021 में अपना बकाया करीब 30 प्रतिशत कम करने में सफल रही हैं, वहीं पिछले एक साल में निजी बिजली उत्पादन कंपनियों के भुगतान में चूक बढ़ी है। निजी बिजली उत्पादन कंपनियों का बकाया इस समय 46,138 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि केंद्रीय जेनको का बकाया 36,768 करोड़ रुपये है। निजी बिजली उत्पादन कंपनियां आपूर्ति कम नहीं कर सकतीं और बिजली खरीद समझौते में टीपीए भी नहीं होता। ऐसे में उनका बकाया बढ़ रहा है।

Rohit Gupta

A journalist, writer, thinker, poet and social worker.

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