शिक्षा सफलता की कुंजी और शिक्षक हैं भविष्य निर्माता: बिश्वनाथ मुखर्जी

विश्व साक्षरता दिवस पर हिण्डालको महान ने शिक्षकों को किया सम्मानित

सिंगरौली, मध्यप्रदेश। बुधवार को बड़ोखर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हिण्डालको महान के मानव संसाधन प्रमुख बिश्वनाथ मुखर्जी ने शिक्षा को सफलता की कुंजी बताते हुये कहा कि शिक्षक भविष्य के निर्माता हैं और जीवन में जिससे भी ज्ञान मिले ग्रहण कर लेना चाहिये। ज्ञानियों की न तो जात होती है न ही उम्र की सीमा। शिक्षा हमारे जीवन का आवश्यक अंग है। व्यक्तित्व के विकास के लिये शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। वास्तव में निरक्षरता अंधकार और साक्षरता प्रकाश के समान है। अच्छा जीवन जीने के लिये लोगों का साक्षर होना जरुरी है। शिक्षा गरीबी उन्मूलन, बाल मृत्युदर को कम करने, जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने, लैंगिक समानता की प्राप्ति आदि के लिये भी जरूरी है। जब देश का हर नागरिक साक्षर होगा तभी देश की प्रगति हो सकेगी। साक्षरता और शिक्षा दोनों साथ-साथ चलें तभी सही भविष्य का निर्माण हो सकता है। अभिप्राय केवल किताबी शिक्षा ही नहीं, बल्कि साक्षरता का अर्थ लोगो में उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरुक कर उन्हें सामाजिक विकास का आधार बनाने से है। साक्षरता गरीबी उन्मूलन, लिंग अनुपात सुधारने, भ्रष्टाचार और आंतकवाद से निपटने में सहायक और समर्थ है।

साक्षरता प्रतिशत बढ़ाना- एक चुनौती: यशवंत कुमार

सीएसआर प्रमुख यशवंत कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा की स्वतंत्रता प्राप्ति के समय से ही देश के नेताओं ने साक्षरता बढ़ाने के लिये कार्य किये और कानून बनाये पर जितना सुधार कागजों में हुआ उतना वास्तव में नही हो पाया। केरल को छोड़ दिया जाय तो देश के अन्य हिस्सों की हालत औसत है। मध्यप्रदेश में वर्तमान में साक्षरता दर 70 प्रतिशत के करीब है व सिंगरौली जिले में औसतन 62 प्रतिशत ही है। वहीं बिहार और उत्तर प्रदेश में साक्षरता दर 70 फीसदी से भी कम है। स्वतंत्रता के समय वर्ष 1947 में देश की केवल 18 प्रतिशत आबादी ही साक्षर थी। बाद में वर्ष 2007 तक यह प्रतिशत बढ़कर 68 हो गयी और 2011 में यह बढ़कर 74 प्रतिशत हो गयी, लेकिन आज भी शत प्रतिशत लक्ष्य से हम दूर हैं, यह चिंता का विषय है। हम पढ़ने वाले बच्चों की हर तरह से मदद करने के लिये तैयार हैं। लेकिन उन्हें पूरे लगन से मेहनत करनी पड़ेगी।

बीरेंद्र पाण्डेय ने किया संचालन

कार्यक्रम का संचालन कर रहे बीरेन्द्र पाण्डेय ने बताया की भारत एक प्रगतिशील देश है। भारत का शैक्षिक इतिहास अत्यधिक समृद्ध है। प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों द्वारा शिक्षा मौखिक रुप में दी जाती थी। शिक्षा का प्रसार वर्णमाला के विकास के पश्चात भोज पत्र और वृक्षों की छालों पर लिखित रुप में होने लगा। तब से भारत में लिखित साहित्य का विकास तथा प्रसार होने लगा। बौद्ध धर्म के प्रचार के साथ-साथ जन साधारण को शिक्षा उपलब्ध होने लगी। नालन्दा, विक्रमशिला और तक्षशिला जैसी विश्व प्रसिद्ध शिक्षा संस्थानों की स्थापना ने शिक्षा के प्रचार में अहम भूमिका निभाई। भारत में अंग्रेजों के आगमन से युरोपीय मिशनरियों ने अंग्रेजी शिक्षा का प्रचार किया।

प्राचार्य को उपचार हेतु दी 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता

हिण्डालको महान के मानव संसाधन प्रमुख ने विद्यालय के प्राचार्य प्रभाकर मिश्रा, जो बीते दिनों बडोखर में भीषण वाहन दुर्घटना के शिकार हो गये थे, उनके इलाज के लिये 50 हजार रुपये की त्वरित आर्थिक सहायता का चेक विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य को देते हुये उनके सुखद स्वास्थ्य की कामना की। वहीं कार्यक्रम में आये हुये समस्त शिक्षकों को श्रीफल व सॉल देकर सम्मानित किया गया।

इनकी रही भूमिका

ट्रांसफार्म सिंगरौली के तहत हिण्डालको महान ने शिक्षा की बेहतरी के लिये किये गए प्रयासों की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए सीएसआर विभाग ने मझिगवां आर एण्ड आर कॉलोनी में संचालित सरस्वती
शिशु मंदिर में विश्व साक्षरता दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें हिण्डालको महान परियोजना के मानव संसाधन प्रमुख बिश्ववनाथ मुखर्जी, सीएसआर विभाग प्रमुख यसवंत कुमार के साथ-साथ सीएसआर विभाग से विजय वैश्य, धीरेन्द्र तिवारी, बीरेन्द्र पाण्डेय, भोला वैश्य, प्रभाकर शामिल हुये, साथ ही विद्यालय के समस्त आचार बन्धु समेत आस-पास शासकीय विद्यालय के शिक्षकगण भी उपस्थित रहे।

Rohit Gupta

A journalist, writer, thinker, poet and social worker.

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