विसंगति: पूमरे को देश का शीर्ष ज़ोन बनाने वाला सिंगरौली हासिये पर

बंद ट्रेनों की पुनर्बहाली के लिए संसद में उठानी पड़ती है आवाज

सिंगरौली। यह विसंगतिपूर्ण ही नहीं चिंतनीय विषय है कि पूर्व मध्य रेल को सबसे अधिक कमाई देकर उसे भारतीय रेल के शीर्ष पर ले जाने वाला सिंगरौली हासिये पर है। धनबाद मंडल के दूरस्थ छोर पर स्थित सिंगरौली और ऊर्जांचल के कुछ अन्य स्टेशनों ने धनबाद मंडल को वित्त वर्ष 2020-2021 में ₹ 14297 करोड़ की कमाई दी। इस क्षेत्र के सहयोग से भारतीय रेल में पूमरे जिसमें धनबाद सहित पाँच मंडल हैं, सिंगरौली परिक्षेत्र के योगदान से रेल मंत्रालय के प्रिय बने हुए हैं। लेकिन पूम रेल प्रशासन ने अपने कमाऊ पुत्र सिंगरौली को अवैध संतान ही माना है। पूमरे ने विकास कार्यों एवं लाखों नागरिकों को आवागमन की सुविधा प्रदान करने के मामले में इसे अंतिम छोर पर ढकेल दिया है। इसका जीवंत उदाहरण है कि यहाँ से चलने व होकर गुजरने वाली ट्रेनों को पुन: बहाल करने और उनकी बारंबारता को बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय सांसद को संसद में गुहार लगानी पड़ती है

ऐसी विसंगति का मुख्य कारण रेल मंडल मुख्यालय धनबाद का लगभग 500 किमी दूर होना ही है। इससे यहाँ के नागरिक विचलित होने लगे हैं और एक बार फिर सिंगरौली के सन् 1996 से लंबित डीआरएम कार्यालय की मांग को सार्वजनिक तौर पर उठाने का मन बनाने लगे हैं।

आश्चर्यजनक तथ्य है कि सिंगरौली से चलने वाली सिंगरौली-वाराणसी इंटरसिटी एक्सप्रेस का परिचालन लगभग दो साल से बंद है। जबकि आध्यात्मिक, मेडिकल एवं रेल व एअर कनेक्टिविटी की सहूलियतों के लिये ऊर्जांचल के लोगों के लिए वाराणसी निकटवर्ती शहर है। वाराणसी व पूर्वांचल से सिंगरौली परिक्षेत्र को जोड़ने वाली एक मात्र पूमरे की गाड़ी सिंगरौली-वाराणसी इंटरसिटी को योजनाबद्ध तरीके से बंद कर दिया गया। इसको फिर से चलाए जाने के विषय में धनबाद मंडल ने अब तक मौन साध रखा है। कोरोना की दूसरी लहर में ऊर्जांचल के लाखों लोगों को चिकित्सा सुविधाओं के लिए इस ट्रेन की दरकार महसूस हुई थी। तब रेल उपभोक्ता सलाहकार समिति के सदस्य लालजी शाहू ने रेल मंडल प्रबंधक धनबाद के साथ हुई वर्चुअल मीटिंग में इस विषय को उठाया भी था। बीते अप्रैल से जून के बीच वाराणसी के लिए समुचित साधन के अभाव में सैकड़ा से अधिक लोगों ने प्राण गंवा दिये। वाराणसी के साथ ही उ.प्र. के पूर्वांचल व वाराणसी के रास्ते दिल्ली व पटना आदि के यात्रियों की सुविधा के लिए भी यह एकमात्र ट्रेन रही है जो बंद है।

सिंगरौली-भोपाल व सिंगरौली-निजामुद्दीन एक्सप्रेस का कोई पता नहीं

सिंगरौली से सप्ताह में तीन दिन चलने वाली सिंगरौली-भोपाल-सिंगरौली एवं साप्ताहिक सिंगरौली-हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली)-सिंगरौली के परिचालन के विषय में भी रेल प्रशासन में कोई हलचल अब तक नहीं दिख रही है। मंडल उपभोक्ता सलाहकार सदस्य लालजी शाहू ने महीनों पहले इनकी मांग उठाई थी। सांसद रीती पाठक ने भी इस विषय को संसद में उठाया है। लेकिन अभी तक ढाक के तीन पात ही हैं।

सिंगरौली को रेल मंडल बनाना ही मात्र विकल्प

सिंगरौली का दुर्भाग्य रहा है कि इसे हर स्तर पर केवल दोहन का केन्द्र माना गया। कड़ी मेहनत और प्रदूषण को झेलते हुए राष्ट्र की उन्नति के लिए सहयोग करने वाले लाखों नागरिकों के उन्नयन एवं उनकी सामान्य नागरिक सुविधाओं के लिए अब सतही नहीं ठोस पहल सांसद श्रीमती पाठक को करनी चाहिए।

सांसद जी के लिए

ज्ञात हो कि सिंगरौली से पूमरे धनबाद मंडल एवं पमरे जबलपुर मंडल मुख्यालय की दूरी 400 से 500 किमी के लगभग है। इन्हीं कारणों से वर्ष 1996 में सिंगरौली में नये रेल मंडल कार्यालय की आधार शिला तत्कालीन रेलमंत्री रामबिलास पासवान ने रखी थी। लेकिन राजनैतिक शिथिलता के कारण यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया।

संसद का मानसून सत्र चल रहा है। सभी तथ्यों के साथ सिंगरौली में डीआरएम कार्यालय के दीर्घलंबित परियोजना को यदि सांसद महोदया जीवंत करवाने में सफल हो जाएं तो संभवतः एक-दो ट्रेनों की मांग सर्वोच्च स्तर पर उठाने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। यह एक अविस्मरणीय कार्य के रूप में सांसद जी के नाम से अंकित हो जाएगा। सिंगरौली-ललितपुर परियोजना को गति देने के लिए आप निश्चित ही धन्यवाद की पात्र हैं।

Rohit Gupta

A journalist, writer, thinker, poet and social worker.

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