6 लाख 15 हजार पशुओं का होगा टीकाकरण व 5 लाख 78 हजार का उपचार

मध्यप्रदेश में करोड़ों पशुओं को लगेंगे टीके

सिंगरौली/सीधी।
वर्षा ऋतु शुरू होते ही पशुओं में भी विभिन्न संक्रामक बीमारियों के फैलनें का खतरा बढ़ जाता है। इसी वजह से जून महीने से मध्यप्रदेश में पशु चिकित्सा विभाग द्वारा पशुओं के लिए टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया गया है। इस अभियान के तहत सीधी जिले में 6 लाख 15 हजार 264 पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी के अनुपात में टीकाकरण के लिए वैक्सीन भी उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं विभाग द्वारा 5 लाख 78 हजार पशुओं के उपचार का लक्ष्य भी चालू वित्तीय सत्र में रखा गया है।

अन्य कार्यों के लिए भी लक्ष्य तय, बंद हुईं कई योजनाएं

कृत्रिम गर्भाधान के लिए 71 हजार, वत्सोत्पादन 23000, बधियाकरण 18000 का लक्ष्य रखा गया है। पशु चिकित्सा विभाग द्वारा चालू वित्तीय वर्ष के लिए पशुओं को बेहतर उपचार सुविधा उपलब्ध करानें के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किंतु सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा पशुपालन विभाग से संबद्ध 10 योजनाओं को बंद कर दिया गया है। इनके लिए कोई भी लक्ष्य एवं वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई है। बैकयार्ड मुर्गी पालन चूजों के 1.08 लाख का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं सीधी जिले के लिए बंद हो चुकी योजनाओं में अनुदान पर बकरा, सांड़ प्रदाय, सूकर एवं सूकर त्रयी प्रदाय, बैंक ऋण एवं अनुदान पर बकरी इकाई प्रदाय, आचार्य विद्यासागर गौ-संवर्धन योजना, अनुदान पर कडक़नाथ चूजा प्रदाय, नंदीशाला योजना, मत्स पालन प्रोत्साहन योजना, दुग्ध उत्पादन वृद्धि दर, अंडा उत्पादन वृद्धि दर योजना पूरी तरह से बंद हो चुकी है।

पालतू पशुओं के लिए पौष्टिक चारा की व्यवस्था तक नहीं बनाई गई है। लिहाजा नए चारे को खाकर पशु बीमार पड़ रहे हैं। पशुपालन से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रदेश शासन की उदासीनता के चलते सीधी जिले के पशुपालक भी काफी प्रभावित हैं। उनको कोई सुविधा एवं मदद नहीं मिलनें से वह पालतू पशुओं की देखभाल भी सही तरीके से नहीं कर पा रहे हैं। वहीं कई प्रमुख योजनाओं के बंद होने से विभाग की ओर से सहयोग को लेकर भी कोई मदद नहीं हो पा रही है। पशुपालन को बढ़ाने के लिए शासन को पूर्व से चल रही योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त बजट की व्यवस्था के साथ ही सुविधाएं भी बढ़ानें की आवश्यकता है। जिससे पशु पालक इनसे जुडकर आर्थिक लाभ भी बिना भटकाव के सुनिश्चित कर सकें।

कडक़नाथ मुर्गा की है काफी मांग

कडक़नाथ मुर्गे की काफी मांग बाजार में है। इस वजह से इसके पालन को लेकर भी लोगों में काफी दिलचस्पी है। विडंबना यह है कि शासन स्तर से कडक़नाथ चूजों के प्रदाय एवं अनुदान की व्यवस्था ही बंद हो चुकी है। इस वजह से सीधी जिले में कडक़नाथ मुर्गा की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। कडक़नाथ मुर्गा कई मायनों में काफी अहम है। इसकी त्वचा और पंखों से लेकर मांस तक का रंग काला होता है। इसमें अधिक मात्रा में प्रोटीन के साथ ही औषधीय गुण भी होते हैं। सफेद चिकन के मुकाबले इसमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी काफी कम होता है। फैट कम होने से हृदय और डायबिटीज रोगियों के लिए यह चिकन बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। कडक़नाथ मुर्गा का चिकन काफी लजीज एवं शरीर के लिए फायदेमंद होने के कारण लोग इसकी मुंह मांगी कीमत देने के लिए तैयार रहते हैं। किंतु सीधी जिले में मुर्गी पालन से जुड़े लोगों को कडक़नाथ मुर्गा पालन की सुविधा लंबे समय से नहीं मिल पा रही है।

Rohit Gupta

A journalist, writer, thinker, poet and social worker.

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