धराशायी हुए पुल मामले में कलेक्टर सख्त, कहा- क्रियान्वयन एजेंसी पर होगी कठोर कार्रवाई

जांच हेतु टीम गठित, धराशायी हुए जरहां पुल में हुई एक मौत, कई घायल

 

सिंगरौली, मध्यप्रदेश। जिले के माड़ा उप खण्ड में स्थित जरहां गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाले पुल के अचानक धराशायी होने के मामले को कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने जांच कमेटी गठित कर अविलंब रिपोर्ट तलब की है। इसे रिपोर्ट आने के बाद दोषी क्रियान्वयन एजेंसी के संबंधित लोगों पर कड़ी कार्रवाई किये जाने का संकेत माना जा सकता है।

पुल टूटने से खड्ड में गिर गई थी ईको वैन

घटना के विषय में बताया जाता है कि तीन दिन पूर्व एक मारुती ईको वैन जैसे ही इस पुल पर पहुंची उसी समय वह पुल कटे हुए पेड़ की तरह धराशायी हो गया। तब पुल पर मौजूद वैन जिसमें एक ही परिवार के लोग बैठे थे वे पुल के साथ ही कई फुट नीचे खड्ड में गिर गए। पुल दुर्घटना की शिकार वैन में सवार तीन साल का बालक अमर शाह निवासी ग्राम रौंदी की वहीं मौत हो गई थी। वहीं बालक के माता-पिता सहित 7 लोग घायल हो गये थे।

चर्चा: एनसीएल के सीएसआर मद से बना था यह पुल

इस घटना के बाद घटिया निर्माण कार्य और अनियमितता को लेकर आम चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय लोग तरह तरह की बातें कर रहे हैं जिससे एनसीएल की अमलोरी परियोजना के साथ ही शासन-प्रशासन की भी किरकिरी शुरू हो गयी है। एक ओर जहां घटिया निर्माण कार्य को लेकर जरहां के ग्रामीणों आक्रोशित हैं तो दूसरी ओर ग्रामीण लामबंद होकर सोमवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने की भी तैयारी कर रहे हैं।

दो साल पहले साढ़े ३ करोड़ की लागत से बनी थी सड़क व पुल

बताया गया है कि लगभग दो वर्ष पूर्व एनसीएल की अमलोरी परियोजना के सीएसआर मद से ग्राम जरहां में सड़क व पुल का निर्माण कार्य करीब साढ़े 3 करोड़ रूपये की लागत से कराया गया था। निर्माण कार्य के दौरान ही गुणवत्ताविहीन कार्य को लेकर ग्रामीणों ने आपत्ति जताते हुए एनसीएल की अमलोरी परियोजना प्रबंधन से शिकायत की थी। लेकिन परियोजना के सिविल अफसरों व ठेकेदार ने उसे अनसुना कर दिया था। आरोप है कि निर्माण कार्य में जमकर कमीशनखोरी की गयी थी। पांच दिन पूर्व अंचल में हुई मूसलाधार बारिश से पुलिया क्षतिग्रस्त हो गयी थी। पंचायत के द्वारा परियोजना को फिर से अवगत कराया गया था। बावजूद इसके वहां पर बैरिकेट तक नहीं लगाये गये थे। लोगों का कहना है कि माड़ा टीआई ने मीडिया भ्रामक जानकारी दी थी कि क्षतिग्रस्त पुलिया के एक साइड में पुलिस द्वारा बैरिकेट लगाये गये थे। चलती वैन के साथ पुलिया के जमींदोज होने के बाद अब एनसीएल परियोजना की जमकर किरकिरी शुरू हो गयी है।

निर्माण एजेंसी का खुलासा होने के बाद होगी दण्डात्मक कार्यवाही-कलेक्टर

कलेक्टर मीणा

कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट तौर पर कहा है कि पुलिया निर्माण का कार्य पंचायत अथवा एनसीएल से कराया गया था यह तय होने के बाद दोषियों को बख्शा नहीं जायेगा। आपराधिक प्रकरण भी दर्ज होगा। यह बड़ी घटना है।
कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने कहा है कि पुलिया के ध्वस्त होने की बड़ी घटना है। इस हादसे में एक बच्चे की जान चली गयी है। कई लोग घायल हैं। इस बात की जांच करायी जा रही है कि पुलिया एवं सड़क निर्माण कार्य पंचायत या एनसीएल के सीएसआर व डीएमएफ फण्ड से तो नहीं हुआ है। इस संबंध में जांच करायी जा रही है। जांच उपरांत दोषियों को बक्सा नहीं जायेगा। सख्त से सख्त कार्रवाई की जायेगी।

फिलहाल कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने इस मामले में सख्त रुख अपना लिया है। उम्मीद है कि शीघ्र जांच उपरांत दोषी क्रियान्वयन एजेंसी व सिविल डिपार्टमेंट अमलोरी परियोजना एवं ठेकेदार के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कराया जाएगा तथा दोषियों से राशि की वसूली व नौकरी करने वाले सेवकों की बर्खास्तगी की कार्रवाई की जायेगी।

एनसीएल व प्रशासनिक टीम ने किया स्थल निरीक्षण

जानकारी के अनुसार पुल के ध्वस्त होने के बाद एनसीएल की अमलोरी परियोजना व सरकारी तंत्र के क्रियाकलापों व भ्रष्टाचार की खुली पोल को लेकर ग्रामीणों में जमकर प्रतिक्रियाएं हो रही हैं। वहीं ग्रामीणों के अनुसार शनिवार को आधा दर्जन से अधिक सरकारी व एनसीएल के लोग घटनास्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने ध्वस्त पुल का सरसरी तौर पर निरीक्षण किया है। आरोप है कि टीम के दौरे की जानकारी गांव वालों को नहीं दी गयी थी। बच्चों की नजर टीम पर पड़ी जिनकी सूचना पर लोग एकत्रित होने लगे तो यह टीम कुछ ही देर में वहाँ से वापस चली गयी।

Rohit Gupta

A journalist, writer, thinker, poet and social worker.

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