चर्चा में: दो पंचवर्षीय से लटके राजमार्ग के लिये फिर हुआ भूमि पूजन, पुरानी शैल पट्टिका ध्वस्त, तीन बार बदला गया नये पट्टिका का मैटर

331.16 करोड़ रुपये की लागत से होगा अनिर्मित हाइवे 39 का- उन्नयन

सिंगरौली, मध्यप्रदेश। रीवा से रांची को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 39 का सीधी से सिंगरौली तक के पैच की स्थिति में सुधार का समाचार गत 8 अक्तूबर को लगभग दो पंचवर्षीय की समयावधि के बाद आया। यह समाचार जितना सुखद है उतना ही चिंतनीय भी। एन एच 39 ने अपनी दुर्गति और दुर्दशा का दंड भले ही लगभग पांच सैकड़ा से अधिक निर्दोष लोगों को देकर उनका रक्तपान क्यों न किया हो, एक दशक के बाद ही सही इसके जीर्णोद्धार के लिए बजट मिलने के बाद जन प्रतिनिधि व सत्ता पक्ष के नेता भूमि पूजन महोत्सव मनाने के लिये देवसर में उमड़ पड़े थे। यह कार्यक्रम संविदा एजेंसी व एमपीआरडीसी के सौजन्य से संपन्न तो हो गया, लेकिन औपचारिक आयोजन के बाद अब चर्चा का दौर चल पड़ा है।

उपस्थित लोग

सांसद रीती पाठक, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय पाठक, विधायक सिंगरौली- रामलल्लू बैस, विधायक चितरंगी-अमर सिंह, विधायक देवसर- सुभाष वर्मा, विधायक धौहनी- कुँअर सिंह टेकाम विधायक सिहावल कमलेश्वर पटेल व अन्य जन प्रतिनिधियों के अतिरिक्त भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष कांतशीर्ष देव सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष सिंगरौली वीरेंद्र गोयल, जिलाध्यक्ष सीधी इन्द्रशरण सिंह एवं जिला प्रशासन के अधिकारी तथा संविदा एजेंसी तिरुपति बिल्डकॉन बुढ़ार के प्रतिनिधि व एमपीआरडीसी के अधिकारी भूमि पूजन कार्यक्रम में सम्मिलित रहे।

एनएच 39 के इस भाग के लिए दोबारा हुआ भूमिपूजन

राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 39 के लिये दूसरी बार किया गया भूमि पूजन व शिलान्यास का कार्यक्रम अब चर्चाओं में है। लगभग दो पंचवर्षीय से पीड़ित और प्रतीक्षारत लोगों की चर्चा में यह भी है कि एक ही सड़क के लिए कितनी बार भूमि पूजन व शिलान्यास किया जाएगा। लोगों का यह भी कहना है कि उन्हें अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि एनएच 39 का सीधी-सिंगरौली मार्ग की स्थिति अगले मानसून के पूर्व तक सुधर पाएगी। चर्चा की जा रही है कि लोकसभा का चुनाव 2024 में होना है, उसके दृष्टिगत यह सड़क 2023 तक धीमी गति से बनाई जाएगी और भावी चुनाव में इसके निर्माण का श्रेय लेने का प्रयास किया जाएगा।

तीन बार बदली गई शिला पट्टिका

आयोजनकर्ताओं और उनके निकटस्थ लोगों के गपशप के हवाले से जनमानस में चर्चा है कि शिलापट्ट पर नाम अंकित करवाने के लिए होड़ मची रही। दूसरी बार के भूमिपूजन व शिलान्यास कार्यक्रम से संबंधित शिला पट्टिका के मैटर को तीन बार संशोधित करना पड़ा। इस मार्ग के निर्माण के लिये पहला व वास्तविक भूमिपूजन वाले शिलालेख को स्तंभ सहित ध्वस्त कर दिया गया और दूसरे स्थान पर नया स्तंभ बनाकर उसमें शिलापट्ट भी लगाया गया था।

शिलान्यास कार्यक्रम

सीधी सिंगरौली सांसद रीती पाठक ने भूमिपूजन का कार्य सिहावल विधानसभा के देवसर क्षेत्र में सीधी सिंगरौली मार्ग एनएच 39 के उन्नयन एवं फोरलेन के शेष कार्य, लागत 331.16 करोड़ के कार्य हेतु किया। कार्यक्रम का आयोजन एमपीआरडीसी सीधी ने कराया था, यह कार्य तिरुपति बिल्डिकॉन नामक संविदा कंपनी को मिला है।

तीन बार क्यों बदला गया शिला पट्टिका का मैटर

♦उद्घाटन के लिए बनाए गए शिलालेख पर जिला पंचायत अध्यक्ष अजय पाठक का नाम नहीं लिखा था, जबकि वे कार्यक्रम में आमंत्रित किए गए थे।

♦प्रशासन के अनुरोध के बाद कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष तब पहुंचे जब प्रशासन ने आनन फानन में नया पोस्टर तैयार कराया और लिखी हुई शिला पट्टिका के ऊपर चिपकाया।

♦सांसद द्वारा किये गए भूमिपूजन वाले पुराने शिलापट्ट को उसके स्तम्भ सहित ध्वस्त कर नया स्तम्भ बनाया गया।

♦चर्चा यह भी है कि भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष कांतशीर्ष देव सिंह के प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ, जबकि शिलापट्टिका में उनका नाम अंकित था। बताया जा रहा है कि इसी कारण से वे कार्यक्रम छोड़कर चले गए।

♦शिलापट्ट के एक मैटर में कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में राज्यसभा सांसद अजय प्रताप सिंह का नाम अंकित था। जबकि इस कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति नहीं थी।

♦आयोजक द्वारा पत्रकारों को आमंत्रित नहीं किये जाने को भी जनप्रतिनिधियों ने गलत माना है।

Rohit Gupta

A journalist, writer, thinker, poet and social worker.

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