सर्वेयरों द्वारा टनों रिजेक्ट किये गए गेंहू मामले की शूरू हुई जांच

जांच दल वेयरहाउसों की जांच के साथ प्रबंधकों का ले रहा बयान

सिंगरौली। रबी सीजन 2021-22 के अंतर्गत खरीदी केन्द्रों में एमएसपी पर गेंहू उपार्जन में संविदा सर्वेयरों द्वारा व्यापक पैमाने पर गोलमाल व अनियमितताओं की चर्चा आम हो गई है। पहले गेंहू को रिजेक्ट करना फिर उन्हें पास कराने के एवज में जमकर सौदेबाजी के मामले ने जब तूल पकड़ा तो कलेक्टर ने प्रभारी उपायुक्त सहकारिता को जांच करने के लिए निर्देशित किया।

उपायुक्त सहकारिता के नेतृत्व में जांच टीम गोदामों में जांच करने पहुंची तो प्रथमदृष्टया उन्हें गेंहू के रिजेक्ट करने में गड़बड़झाला करने की बू आने लगी।

कलेक्टर के कड़े रुख के बाद मचा हड़कंप

गौरतलब हो कि जिले में समर्थन मूल्य के तहत 52 केन्द्रों में करीब 435395 क्विंटल गेंहू की खरीदी की गयी थी। गेंहू के इस खरीदी में करीब आधा दर्जन से ऊपर समितियों में संविदा सर्वेयरों ने करीब 19 हजार क्विंटल गेंहू को रिजेक्ट कर दिया था। गेंहू के रिजेक्ट करने के कई कारण जैसे पतला, घुना, सड़ा, कचड़ायुक्त होना बताया गया। आश्चर्यजनक बात यह रही कि गेंहू उपार्जन के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों की अवहेलना की गई। स्थापित निर्देशों के अनुसार यदि किन्हीं कारणों से फसल में गड़बड़ी है और उसे रिजेक्ट कर दिया गया है तो 48 घण्टे के अंदर पोर्टल में अपलोड करना होता है। जबकि ऐसा खरीदी केन्द्रों में तैनात सर्वेयरों द्वारा नहीं कराया गया। इन्हें 10 से 20 दिन बाद पोर्टल पर अपलोड कराया गया। जब यह मामला काफी तूल पकड़ा तो कलेक्टर मीना ने कड़ा रुख अपनाया और उसके बाद समितियों व वेयर हाउस गोदाम के कर्मचारियों में हड़कम्प मच गया।

पहले रिजेक्ट फिर किया अपग्रेड

कलेक्टर के निर्देश पर उपायुक्त सहकारिता पीके मिश्रा के नेतृत्व में मंगलवार को गोदामों का जांच करने गयी तीन सदस्यीय टीम को रिजेक्ट गेंहू को अपग्रेशन कराने में गड़बड़झाला समझ मेें आया है। सूत्र बताते हैं कि पहले किसानों से मोलभाव, सौदेबाजी किया गया और जब कथित सर्वेयरों की मंशा पूरी नहीं हुई तो उनके गेंहू को रिजेक्ट कर दिया गया। वहीं करीब 12 हजार क्विंटल गेंहू का अपग्रेशन करा दिया गया है। गेंहू खरीदी और रिजेक्शन के इस मामले में सर्वेयरों के साथ-साथ वेयर हाउस गोदाम के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। वहीं वेयर हाउस गोदाम प्रभारी की चुप्पी भी कई प्रश्नों को जन्म दे रही है। फिलहाल जांच टीम समितियों से दस्तावेज मंगाकर उनके बयान ले रही है और दो दिन बाद उपायुक्त सहकारिता पीके मिश्रा कलेक्टर को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे।

एक दो दिन में जांच प्रतिवेदन के सौंपे जाने की संभावना

सूत्रों के अनुसार उपायुक्त सहकारिता पीके मिश्रा के नेतृत्व में जिला खाद्य अधिकारी, नागरिक आपूर्ति प्रबंधक ने आधा दर्जन क्रय समितियों से दस्तावेज लेते हुए बयान दर्ज किये हैं। जबकि अभी 3- 4 खरीदी केन्द्रों के समितियों के कर्मचारियों का बयान लेना शेष है और बयान लेने की औपचारिकता संभवत: एक-दो दिन में पूर्ण कर ली जायेगी।

कहाँ भंडारित है टनों रिजेक्ट गेहूँ

इस दौरान रिजेक्ट हुआ गेंहू जो टनों में है, उसका भण्डारण कहां किया गया है ? इस सवाल का सही जबाव अब तक सामने नहीं आया है। इस घिनौने खेल में वेयर हाउस कर्मियों के क्रियाकलापों पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है। आम चर्चा यह भी है कि अनाज माफिया सक्रिय हैं जो रिजेक्ट जिन्स के नाम पर अच्छे किस्म के अनाज की को कम मूल्य पर मिलों को मुहैया कराने का काम कर रहे हैं।

उपायुक्त का कहना

उपायुक्त सहकारिता पीके मिश्रा का कहना है कि
गोदामों का निरीक्षण कर समितियों से दस्तावेज मंगाये गये और आधा दर्जन प्रबंधकों के बयान भी लिये गये हैं। कुछ समितियों के प्रबंधकों का बयान लेना अभी शेष है। दो-तीन दिन के अंदर जांच प्रक्रिया पूर्ण हो जायेगी और जांच प्रतिवेदन शीघ्र ही कलेक्टर के यहां प्रस्तुत किया जायेगा।

Rohit Gupta

A journalist, writer, thinker, poet and social worker.

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