रिटायर्ड डीएसपी की अग्रिम जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट से हुई खारिज

बीते 45 दिन से वाराणसी जेल में बन्द है चार अभियुक्त

वाराणसी/सिगरौली । वर्ष 1997 में फूलपुर थानान्तर्गत कुआर बाज़ार निवासी ट्रक मालिक ओमप्रकाश गुप्ता के मौत के मामले में उनके पुत्र संजय गुप्ता द्वारा दर्ज कराए गए अपहरण व हत्या के मामले में जिला अदालत द्वारा अग्रिम जमानत खारिज होने के पश्चात अभियुक्त आर राजन (रिटायर्ड डीएसपी शहडोल) व शंखधर द्विवेदी इंस्पेक्टर गढ़वा सिगरौली ( म0 प्र0) द्वारा उच्च न्यायालय इलाहाबाद से अग्रिम जमानत प्राप्त कर लिया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे अब खारिज कर दिया है। संजय गुप्ता द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर किया गया जिसपर न्यायालय द्वारा पहले स्थगनादेश पारित किया गया। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 14 अप्रैल तक वाराणसी न्यायालय में समर्पण के लिए कहा गया। जिसके अनुपालन में दोनों अभियुक्त सीजेएम के यहाँ आत्मसमर्पण कर दिए तब से आजतक जेल में हैं। इसी 25 मई को फाइनल सुनवाई करते हुए 4 आरोपियों का अग्रिम जमानत मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया गया। आरोप है कि दोनों अभियुक्त जगत सिंह व शेर अली जिला अदालत से जमानत खारिज होने के पश्चात उच्च न्यायालय इलाहाबाद से तथ्यों को छिपाकर जमानत प्राप्त कर लिए थे, जबकि पहले से उक्त प्रकरण में मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थगनादेश था। यह दोनों भी 18 मई से जेल में है।
इसी प्रकरण की अग्रिम जमानत पर फाइनल सुनवाई करते हुए मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आर राजन,शंखधर द्विवेदी, जगत सिंह व शेर अली की जमानत याचिका खारिज कर दिया गया। वादी संजय गुप्ता का पक्ष शुरू से ही दिव्येश प्रताप सिंह एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट मे रख रहे हैं।
ज्ञात हो कि वर्ष 1997 में अदालत के आदेश पर मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस द्वारा आरोपियों के पक्ष में फाइनल रिपोर्ट लगा दिया गया जिसपर वादी संजय गुप्ता द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता फौजदारी देवेन्द्र सिंह के माध्यम से एक प्रोटेस्ट दाखिल किया गया अदालत द्वारा संज्ञान लेते हुए तलबी आदेश जारीहुआ।
जिसपर आरोपियों को उच्च न्यायालय से 2007 में स्थगनादेश मिल गया तब से सभी आरोपी स्थगनादेश पर ही थे।उच्च न्यायालय में बहस होने के बावजूद आदेश नहीं हुआ तब विवश होकर वादी द्वारा मा0 सुप्रीम कोर्ट में 2018 में याचिका दायर किया गया 23 सिंतबर 2020 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टे खारिज कर दिया गया। कड़ा रुख अपनाते हुए उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार को कारण बताने के लिए कहा गया कि क्यों 13 साल तक अवैध हिरासत में मौत के मामले में स्टे दिया जाता रहा।साथ ही आरोपियों को स्थानीय अदालत में हाजिर होने व 1 वर्ष के भीतर नियमित सुनवाई करते हुए फैसले का आदेश स्थानीय अदालत को दिया गया। वादी संजय गुप्ता ने बताया कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, उच्चतम न्यायालय के इस आदेश से अब शीघ्र न्याय की उम्मीद भी जग गई है।

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