विधानसभा में वेंटिलेटर बोलना माना जाएगा असंसदीय, कांग्रेस ने खड़े किए सवाल

भोपाल । मध्य प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है। इससे ठीक एक दिन पहले रविवार को विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने ऐसे शब्दों की सूची जारी की है जिसे असंसदीय माना जाता है और विधानसभा में सदन के भीतर इन्हें बोलने की पाबंदी रहेगी। मध्य प्रदेश विधानसभा के इतिहास में पहली बार इस तरह का प्रयोग किया गया है।

किन शब्दों पर रहेगी पाबंदी
करीब 1600 शब्दों को विधानसभा सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले असंसदीय माना गया है। इनमे वेंटिलेटर, पप्पू पास हो गया, दादागिरी, चोर मचाए शोर, मिर्ची लग गई , हत्यारे, मंत्री की बहू ने आत्महत्या कर ली, शर्म करो, यह झूठ का पुलिंदा है, चमचा, भेदभाव, चापलूस, नौटंकी, पप्पू माई का लाल, मुक्का मारा, व्यभिचारी, शर्मनाक, चड्डी वाला, गोलमाल, मुर्गा और दारू में पैसे खत्म कर देते हैं, सोच में शौच भरा है, फर्जी पत्रकार, नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली, मां कसम, गुंडे, तानाशाही, अंगूठा छाप, नक्सलवादी, चुड़ैल, जनसंघी जैसे शब्द शामिल हैं।

वेंटिलेटर पर पाबंदी से उठे सवाल
सदन की कार्यवाही के दौरान जिन शब्दों को और संसदीय बताया गया है उनमें एक शब्द वेंटिलेटर भी है। अब कांग्रेस यह सवाल उठा रही है कि कोरोना काल के दौरान बड़ी संख्या में खराब वेंटिलेटर शिकायत सामने आई थी ऐसे में विधायक अगर सरकार से सवाल पूछेंगे वेंटिलेटर की जगह किस शब्द का इस्तेमाल करें।

ऐसे शब्दों का चयन ही क्यों करें : शिवराज
रविवार को विधानसभा परिसर में इस डायरेक्टरी का विमोचन किया गया जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि `कई बार हम ऐसे शब्दों का चयन कर जाते हैं, जिससे सुनने वाला निराश होता है। विधानसभा व लोकसभा ईंट-गारे का भवन नहीं, लोकतंत्र के मंदिर हैं. विधानसभा में असंसदीय शब्दों की जानकारी एक साथ संग्रहित कर उसे सार्वजनिक करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष का धन्यवाद।

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