सरस्वती विन्ध्यनगर में मनाया गया शिक्षक दिवस

विद्यार्थियों ने आचार्य दीदीयों का किया सम्मान

सिंगरौली, मध्यप्रदेश। शालेय शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ठ पहचान के लिए प्रख्यात सरस्वती विद्यालय विन्ध्यनगर में विद्यार्थियों द्वारा शिक्षक दिवस का कार्यक्रम गरिमापूर्ण ढ़ग से मनाया गया। इस कार्यक्रम में विद्यालय के व्यवस्थापक और एन.टी.पी.सी. परियोजना के अपर महाप्रबन्धक उमेश कुमार मुख्य अतिथि तथा कार्यक्रम के अध्यक्षता विभाग समन्वयक ऊर्जांचल विभाग रवि मिश्रा कर रहे थेे।

प्राचार्य बैकुण्ठ शाह, प्रधानाचार्य राजेश कुमार सिंह एवं समस्त आचार्य-दीदीयों की गरिमामयी उपस्थिति में कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती एवं माँ भारती के समक्ष आरती एवं पूजा-अर्चन से किया गया। सरस्वती वन्दना के पश्चात् अतिथि परिचय एवं स्वागत समारोह सम्पन्न हुआ। विद्यालय के विद्यार्थियों ने अतिथियों एवं आचार्य परिवार का तिलक वन्दन कर पूष्पगच्छ से स्वागत किया। इसी क्रम में छात्र छात्राओं ने गीत, कविता एवं भाषण प्रस्तुत कर बताया कि गुरु ज्ञान के सागर होते हैं।

शिक्षा से ही भारत बनेगा विश्व गुरु: उमेश कुमार

मुख्य अतिथि के आसंदी से श्री कुमार ने कहा कि डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक दार्शनिक के साथ-साथ दूरदृष्टा थे। उन्होंने अपना जन्म दिवस शिक्षकों को समर्पित करते हुए शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की परिपाटी रखी। पूर्व में शक्ति एवं पैसे का बोल-बाला था, किन्तु आज शिक्षा की शक्ति पूरे विश्व में काम कर रही है। शिक्षा से ही देश को आगे बढ़ाया जा सकता है और भारत को विश्वगुरु के रुप में स्थापित किया जा सकता है।

यह आधुनिक शिक्षा का युग है: श्री शाह

प्राचार्य श्री शाह ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान में शिक्षा प्रणाली की तकनीकि बदल गयी है। वर्तमान में संचार तकनीकी एवं आधुनिक शिक्षा का युग है। सरस्वती शिशु मन्दिर अनुशासित संस्था है। विद्यार्थी यहाँ से शिक्षा प्राप्त कर माता-पिता, समाज एवं देश का नाम रोशन करें। आपने गुरु-शिष्य के संबंध को पवित्र एवं आत्मीय बताया। शिक्षक जितना अपने परिवार की चिन्ता नहीं करते हैं अपने विद्यार्थियों को साहस, पराक्रम के साथ ही संस्कार व विश्वास के साथ पॉजिटिव सोच बनाते हुये संस्कारों को व्यावहारिक जीवन में उतारने की अपील की।

राष्ट्र निर्माता हैं शिक्षक: रवि मिश्र

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विभाग समन्वयक रवि मिश्रा ने कहा कि हजारों विद्यार्थियों का भविष्य शिक्षक के हाथों में होता है। इसलिए शिक्षक को राष्ट्र निर्माता कहा जाता है। विद्यार्थियों को भी अनुशासित होकर शिक्षा ग्रहण करना चाहिए। शिक्षा, संस्कार, नैतिकता, अनुशासन सरस्वती शिशु मन्दिर की पहचान है। अतः इन सभी गुणों को आत्मसात करते हुये विद्यार्थी एक सुयोग्य नागरिक बनकर इस देश एवं समाज की सेवा करें। कार्यक्रम का संचालन कक्षा द्वादश के भैया-बहनों द्वारा किया गया।

Rohit Gupta

A journalist, writer, thinker, poet and social worker.

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