मध्यप्रदेश के कई जिलों में गहराई बाढ़ की विभीषिका

सरकार बचाव व राहत कार्य में युद्धस्तर पर जुटी

मुख्यमंत्री ने कहा-बाढ़ प्रभावितों को करेंगे हर संभव सहयोग, मुख्यमंत्री शिवराज ने प्रदेश की जनता के नाम भेजा संदेश

भोपाल, मध्यप्रदेश। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बाढ़ की विभीषिका से प्रभावित प्रदेश के कई जिलों की स्थिति की समीक्षा के बाद कहा है कि पिछले दिनों भयंकर वर्षा के कारण उत्तरी मध्यप्रदेश के कई जिलों विशेषकर ग्वालियर-चंबल संभाग और विदिशा जैसे जिलों में बाढ़ ने तबाही मचा दी। अतिवृष्टि भी साधारण नहीं थी। ऐसी वर्षा कभी देखी नहीं थी।

आपदा और तबाही

अकेले श्योपुर जिले में 101 सेंटीमीटर बारिश हो गई। कभी भी इस समय तक 30 से.मी. से ज्यादा बारिश नहीं होती थी। शिवपुरी में 99 से.मी. बारिश हो गई। बारिश ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए। इस भयानक वर्षा के कारण नदियों में भयंकर बाढ़ आ गई। ऐसा सैलाब इस सदी में देखा नहीं गया। गाँव के गाँव तबाह हो गए। मकान डूब गए, पशु बह गए, लोग बाढ़ में फँस गए। पानी जब नीचे उतरा, कई जगह हजारों मकान मलबे के ढेर में तब्दील हो गए। गृहस्थी उजड़ गई। फसलों को नुकसान पहुँचा। अधोसंरचना ध्वस्त हो गई। सड़कें टूट गईं। बिजली के सब स्टेशन डूब गए। कुछ जगह तो पुल भी बह गए। ऐसी भयानक त्रासदी कभी नहीं देखी गई।

राहत व बचाव

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आपदा के आते ही मैं भी सक्रिय हो गया और प्रशासन भी सक्रिय था। मंत्री अपने क्षेत्रों में अपने प्रभार के जिलों में पहुँच गए। प्रधानमंत्री जी से मैंने कई बार बात की और प्रधानमंत्री जी ने भी फोन किए। हमारे आग्रह पर तत्काल एयर फोर्स के हेलीकॉप्टर भेजे गए। एयर फोर्स के 6 हेलीकॉप्टर, बीएसएफ के जवान, सेना के जवान, आर्मी, एनडीआरएफ की टीम भेज दी गई। अपनी एसडीआरएफ की टीम ने भी खूब काम किया। पुलिस प्रशासन, निचले स्तर तक के कर्मचारी, कई नौजवान, समाज-सेवी बचाव के काम में लगे। मैंने बाढ़ग्रस्त इलाकों के हालात भी जाकर देखे। नुकसान बहुत हो गया। लेकिन एक बात राहत की है कि हम लोगों की जिन्दगी बचाने में सफल हो गए। लगभग 8 हजार 900 लोग जो बाढ़ के पानी में अलग-अलग जगह फँस गए थे, कोई टापू पर बैठा था, कोई घरों की छत पर बैठा था, कोई मंदिरों के ऊपर था, कोई पेड़ों पर था। एयर फोर्स के हेलीकॉप्टर, सेना के जवानों ने और एसडीआरएफ के जवानों ने हमारे पुलिस के जवानों के साथ लोगों का रेस्क्यू किया और बीच पानी में डूबते हुए उन्हें बचाने में सफलता प्राप्त की।

जान बची माल की क्षति

इस दौरान 32 हजार 900 लोग बाढ़ से निकालकर ऊंचे स्थानों पर पहुँचाए गए, राहत शिविरों में रखे गए। हमने जानें बचा लीं लेकिन माल नहीं बचा पाए। गृहस्थी उजड़ी, सामान नष्ट हुआ, दुकानों में रखा सामान भी नष्ट हो गया, घर के अन्दर का सामान खराब हो गया, काम-धंधे चौपट हो गए।

दर्जन भर मंत्रियों की टास्क फोर्स बनी

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि निराश होने की जरूरत नहीं है, हम तत्काल राहत के काम में लग गए हैं। मैंने राहत के कार्यों के लिए 12 मंत्रियों की टास्कफोर्स बनाई है। सारे प्रमुख विभाग के अफसर उसमें सम्मिलित हैं। राहत के कामों, सहायता, पुनर्वास और पुनर्निमाण के काम के लिए मैं स्वयं, मंत्रियों की टीम और अधिकारी जुटेंगे। क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटियाँ भी सहयोग देंगी। हमने तत्काल कोशिश की कि कम से कम जिनका सब कुछ उजड़ गया उनको भोजन मिल जाए। भोजन की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था यह हमारी प्राथमिकता है। इस काम में हम लगे हुए हैं। हमने फैसला किया है कि तत्काल प्रत्येक बाढ़ पीड़ित परिवार को जो नियमित राशन मिलता है उसके अतिरिक्त 50 किलो राशन और दे दिया जाए। वो भी आप तक पहुँचा रहे हैं। जहाँ संभव होगा गेहूँ पिसवाकर आटा भेजने की कोशिश करेंगे ताकि तात्कालिक रूप से भोजन की व्यवस्था हो सके।

राहत घोषित

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जिनके घर पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं उनके लिये तत्काल राहत के रूप में 6 हजार रूपए का प्रावधान कर दिया है, ताकि वो चाहें तो किसी किराए के कमरे में भी कुछ दिन रह सकें। साथ ही जिनके घरों में रखा सामान नष्ट हो गया है, सर्वे करके उसके लिए भी राहत की राशि आरबीसी 6-4 के अंतर्गत देंगे। मेरे भाई-बहनों, जिनके मकान बह गए हैं, पूर्णत: नष्ट हो गए हैं, निराश मत होना, उनके मकान बनवाने के लिए राशि दी जाएगी। प्रधानमंत्री आवास योजना की तर्ज पर लगभग उतने ही रूपए की राशि हम देने की व्यवस्था कर रहे हैं, जिससे आपका घर फिर से खड़ा हो सके।

मृतक आश्रित को चार लाख

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यदि बाढ़ के कारण किसी भाई-बहन की मृत्यु हो गई हो तो उसके परिजनों को 4 लाख की आर्थिक सहायता दी जाएगी। जिनके पशु गाय, बैल, भैंस आदि बह गए हैं। हमने तय किया है कि जो दुधारू (गाय-भैस) पशु हैं उनके लिए 30 हजार रूपए की राहत की राशि दी जाएगी। जो गैर दुधारू पशु हैं उनके लिए भी 25 हजार रूपए की राहत राशि दी जाएगी। कई गरीब परिवार बकरी पालन भी करते हैं। अगर भेड़-बकरी बह गई होंगी तो 3 हजार रूपए की राहत राशि देंगे और बकरी का छोटा बच्चा अगर बहा होगा तो 250 रूपए उसके लिए भी देंगे। मुर्गा-मुर्गी अगर बह गए होंगे तो 60 रूपए की राशि राहत के तौर पर दी जाएगी। दुकानों में रखा सामान अगर नष्ट हो गया हो तो क्षति का आंकलन करके उसमें भी कुछ राहत राशि देंगे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बाढ़ के कारण फसलों की क्षति का आंकलन करके उसके लिए भी राहत राशि दी जाएगी। अगर किसी मछुआरे की नाव बह गई होगी या पूरी तरह से नष्ट हो गई होगी तो उसके लिए 12 हजार रूपए, चाल जैसी कोई चीज बह होगी या नष्ट हो गई होगी तो उसके लिए भी 4 हजार रूपए की राशि देंगे। नाव में आंशिक क्षति पर 4 हजार रूपए की राहत की राशि दी जाएगी।

अधोसंरचना ध्वस्त, युद्ध स्तर पर होगा पुनर्स्थापन

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कई तरह की अधो-संरचनाएँ नष्ट हो गई हैं। अभी हमारी प्राथमिकता है कि युद्ध स्तर पर बिजली की व्यवस्था को बहाल करें। क्योंकि कई स्टेशन, सब-स्टेशन डूब गए हैं, खंभे टेढ़े हो गए हैं, ट्रांसफार्मर खत्म हो गए हैं। जहाँ पानी नहीं है वहाँ दिक्कत नहीं, पर कई जगह पानी भरा हुआ है, वहाँ पानी उतरने का इंतजार करना पड़ेगा। लेकिन बाकी जगह बिजली की व्यवस्था बहाल कर दी गई है। सड़कों की अस्थाई मरम्मत हो जाएँ, उसके प्रयास में हम लग गए हैं। पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध हो जाए, पेयजल स्त्रोत ठीक किए जाएं, इस काम में युद्ध स्तर पर पीएचई के कर्मचारी जुट गए हैं। हर तरह की आवश्यक व्यवस्था बनाने में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मैं जानता हूँ आपको कष्ट हुआ है। दर्द गहरा है, सरकार के लिए भी चुनौती बड़ी है, लेकिन हमारा हौसला भी बड़ा है। तकलीफ आयी है, परेशानी है संकट है, लेकिन इस संकट के पार आपको निकाल कर ले जाएंगे। चिंता मत कीजिए बहनों और भाईयो, ये मुसीबत के दिन हमारे जीवन में आए हैं लेकिन जल्दी इस मुसीबत से निकाल कर आपको बाहर ले जाएंगे। सामान्य दिन बहाल करेंगे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मैं सभी समाज-सेवियों, दान-दाताओं अपील करना चाहता हूँ कि पीड़ित मानवता की सेवा सबसे बड़ा पुण्य है। “परहित सरिस धर्म नहीं भाई” और इसलिए आप जो भी सहयोग कर सकते हैं अपने पीड़ित भाई और बहनों के लिए करें।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि एक बार फिर मैं अपने पीड़ित भाईयो और बहनो से निवेदन करना चाहता हूँ कि निराश मत होना, आँखों में आँसू मत लाना, घबराना मत, हम साथ हैं, मिलकर इस कष्ट से निकलेंगे। आपके साथ सरकार खड़ी है, प्रशासन खड़ा है, समाज खड़ा है। ये रैन अंधेरी बीतेगी ये मेरा विश्वास है हम इस संकट के पार जाएंगे।

Rohit Gupta

A journalist, writer, thinker, poet and social worker.

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