मध्यप्रदेश शासन की अप्रतिम पहल “वनवासी लीलाओं” की 16 से होंगी प्रस्तुतियां

🔴 संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन के सहयोग से प्रदेश के 89 जनजातीय ब्लॉकों में होंगी प्रस्तुतियां

singraulitimes.com

आर.बी. सिंह ‘राज’ का आलेख

🔴मध्य प्रदेश,भोपाल/सीधी
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान की घोषणा के परिपालन में मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा तैयार रामकथा साहित्य में वर्णित वनवासी चरित्रों पर आधारित ‘वनवासी लीलाओं‘ क्रमशः ‘भक्तिमती शबरी’ और ‘निषादराज गुह्य’ की प्रस्तुतियां जिला प्रशासन के सहयोग से प्रदेश के 89 जनजातीय ब्लॉकों में होंगी। इस कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू मुख्य अतिथि होंगी।

इस कार्यक्रम की कड़ी में जिला प्रशासन-सीधी के सहयोग से दो दिवसीय वनवासी लीलाओं की प्रस्तुतियां बालक उत्कृष्ट विद्यालय परिसर, कुसमी (सीधी) में 16 नवंबर को विनोद मिश्रा एवं साथी रीवा द्वारा भक्तिमति शबरी की प्रस्तुति दी जायेगी। कार्यक्रम के दूसरे दिन 17 नवंबर को भारती सोनी सीधी द्वारा निषादराज गुह्य की प्रस्तुति दी जायेगी। इन दोनों ही प्रस्तुति का आलेख योगेश त्रिपाठी एवं संगीत संयोजन मिलिन्द त्रिवेदी द्वारा किया गया है। कार्यक्रम प्रतिदिन सायं 7 बजे से आयोजित किया जायेगा।

लीला की कथाएं…

वनवासी लीला नाट्य भक्तिमति शबरी कथा में बताया कि पिछले जन्म में माता शबरी एक रानी थीं, जो भक्ति करना चाहती थीं लेकिन माता शबरी को राजा भक्ति करने से मना कर देते हैं। तब शबरी मां गंगा से अगले जन्म भक्ति करने की बात कहकर गंगा में डूब कर अपने प्राण त्याग देती हैं। अगले दृश्य में शबरी का दूसरा जन्म होता है और गंगा किनारे गिरि वन में बसे भील समुदाय को शबरी गंगा से मिलती हैं। भील समुदाय शबरी का लालन-पालन करते हैं और शबरी युवावस्था में आती हैं तो उनका विवाह करने का प्रयोजन किया जाता है। लेकिन अपने विवाह में जानवरों की बलि देने का विरोध करते हुए, वे घर छोड़कर घूमते हुए मतंग ऋषि के आश्रम में पहुंचती हैं, जहांँ ऋषि मतंग माता शबरी को दीक्षा देते हैं। आश्रम में कई कपि भी रहते हैं जो माता शबरी का अपमान करते हैं। अत्यधिक वृद्धावस्था होने के कारण मतंग ऋषि माता शबरी से कहते हैं कि इस जन्म में मुझे तो भगवान राम के दर्शन नहीं हुए, लेकिन तुम जरूर प्रतीक्षा करना भगवान अवश्य दर्शन देंगे। लीला के अगले दृश्य में गिद्धराज मिलाप, कबंद्धासुर संवाद, भगवान राम एवं माता शबरी मिलाप प्रसंग मंचित किए जाएंगे। भगवान राम एवं माता शबरी मिलाप प्रसंग में भगवान राम माता शबरी को नवधा भक्ति कथा सुनाते हैं और शबरी उन्हें माता सीता तक पहुंचने वाले मार्ग के बारे में बताती हैं। लीला नाट्य के अगले दृश्य में शबरी मुक्त हो समाधि ले लेती हैं।

वनवासी लीला नाट्य निषादराज गुह्य में बताया गया है कि भगवान राम ने वन यात्रा में निषादराज से भेंट की। भगवान राम से निषाद अपने राज्य जाने के लिए कहते हैं। लेकिन भगवान राम वनवास में 14 वर्ष बिताने की बात कहकर राज्य जाने से मना कर देते हैं। आगे के दृश्य गंगा तट पर भगवान राम केवट से गंगा पार पहुंचाने का आग्रह करते हैं लेकिन केवट बिना पांव पखारे उन्हें नाव पर बैठाने से इंकार कर देता है। केवट की प्रेम वाणी सुन प्रभु राम द्रवित होते हैं। आज्ञा पाकर वह गंगाजल से केवट श्री राम के पांव पखारते हैं। नदी पार उतारने पर केवट राम से उतराई लेने से इंकार कर देते हैं। कहते हैं कि हे प्रभु हम एक जात के हैं मैं गंगा पार कराता हूं और आप भवसागर से पार कराते हैं। इसलिए उतरवाई नहीं लूंगा। लीला के अगले दृश्यों में भगवान राम चित्रकूट होते हुए पंचवटी पहुंचते हैं। सूत्रधार के माध्यम से कथा आगे बढ़ती है। रावण वध के बाद श्री राम अयोध्या लौटते हैं और उनका राज्याभिषेक होता है। लीला नाट्य में श्री राम और वनवासियों के परस्पर सम्बन्ध को उजागर किया गया है।

Rohit Gupta

A journalist, writer, thinker, poet and social worker.

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